Headlines

Sawan 2023: सावन आया …खुशिया लाया !! पूजाविधि, महत्त्व और इतिहास। क्यों करनी है शिवजी की आराधना ? जानिए।

Sawan 2023: सावन आया …खुशिया लाया !! पूजाविधि, महत्त्व और इतिहास। क्यों करनी है शिवजी की आराधना ? जानिए।

हमारा भारत देश एक उत्सवप्रिय देश है। छोटे बड़े हर कोई त्यौहार और उत्सव भारतवासी बड़े धूमधाम और श्रद्धापूर्वक तरीके से मनाते है। हिन्दू देवीदेवताओंके विशेष रूप से आने वाले त्यौहार तो सभी को पसंद होते है , जैसे की गणेशोत्सव ,नवरात्रि इत्यादि।

वैसेही हमारे देश में सावन मास का बहोत महत्त्व है। मराठीमें इसे श्रावण मास भी कहा जाता है।

सावन मास हिंदुओंके लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस महीने में खास तौर से भगवन शिव और माता पार्वतीजी की विशेष पूजा होती है।

श्रद्धालु अपने आसपास के शिवमंदिर में दर्शन के लिए जाते है।

सावन महीने में सोमवार का बड़ा महत्त्व है। सावन मास साधारण जुलाई अगस्त के दरम्यान आता है।

2023 का सावन मास लगभग दो महीना चलेगा क्योंकि इस साल “अधिक मास ” आ रहा है। बहोत सारे भक्त सोमवार के दिन व्रत रखते है। फिर मंदिर में जाकर शिवलिंग पर अभिषेक भी किया जाता है।

unsplash

सावन महीना सुरु होने की तारीख:

साल 2023 में सावन महीना 4 जुलाई 2023 से सुरु हो रहा है।

सावन महीना समाप्त होने की तारीख:

साल 2023 में सावन महीना 31 अगस्त 2023 को  समाप्त  हो रहा है।

सावन महीने का विशेष महत्त्व:

हिंदू परंपरा में, सावन (जिसे श्रावण भी कहा जाता है) का महीना अत्यधिक शुभ माना जाता है और इसका बहुत महत्व है।

यह हिंदू चंद्र कैलेंडर का पांचवां महीना है और आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में जुलाई और अगस्त के बीच आता है।

सावन विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा से जुड़ा है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। इस महीने के दौरान, भगवान शिव के भक्त उनका आशीर्वाद पाने के लिए विभिन्न धार्मिक प्रथाओं और अनुष्ठानों का पालन करते हैं।

कई हिंदुओं का मानना ​​है कि सावन के दौरान भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। भक्त अक्सर उपवास करते हैं, शिव मंदिरों में जाते हैं, और भगवान शिव को समर्पित विशेष प्रार्थनाएँ और अनुष्ठान करते हैं।

भारत के कई हिस्सों में सावन को मानसून के मौसम के आगमन से भी जोड़ा जाता है। मौसम की पहली बारिश पवित्रता और पुनर्जीवन का प्रतीक मानी जाती है। भक्त अक्सर नदियों, विशेषकर गंगा से पवित्र जल इकट्ठा करते हैं, जो इस महीने के दौरान विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। वे इस जल को भगवान शिव को चढ़ाते हैं और विभिन्न धार्मिक समारोहों में इसका उपयोग करते हैं।

कई भक्त सावन के दौरान सोमवार (जिन्हें “सोमवार” के नाम से जाना जाता है) को विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानते हैं। सोमवार को भगवान शिव का दिन माना जाता है और इस महीने के दौरान, भक्त बड़ी संख्या में शिव मंदिरों में इकट्ठा होते हैं, खासकर वाराणसी और हरिद्वार जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में स्थित मंदिरों में।

कुल मिलाकर, सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यधिक भक्ति और आध्यात्मिक अभ्यास का समय है, जिसमें उनका आशीर्वाद प्राप्त करने, तपस्या करने और धर्मपरायणता के कार्यों में संलग्न होने पर जोर दिया जाता है।

सावन मास का इतिहास:

सावन मास के आरम्भ की वैसे तो बहोत सारी कहानिया बताई जाती है , लेकिन सबसे प्रचलित समुद्र मंथन की कहानी बतायीं जाती है।

हिंदू धर्मग्रंथों की एक लोकप्रिय पौराणिक कहानी , जिसे समुद्र मंथन  के नाम से जाना जाता है।

इस किंवदंती के अनुसार, देवों (आकाशीय प्राणी) और असुरों (राक्षसों) ने अमरता के दिव्य अमृत, जिसे अमृता के नाम से जाना जाता है, की तलाश में ब्रह्मांड महासागर का मंथन करने के लिए सेना में शामिल हो गए। मंथन प्रक्रिया के दौरान, समुद्र से कई दिव्य प्राणी, वस्तुएं और खजाने निकले। सामने आने वाली महत्वपूर्ण संस्थाओं में इच्छा पूरी करने वाली गाय कामधेनु, अप्सराओं के नाम से जानी जाने वाली दिव्य अप्सराएं, पवित्र नदी गंगा, अमृत का बर्तन ले जाने वाले दिव्य चिकित्सक धन्वंतरि और धन की देवी लक्ष्मी शामिल थीं।

हालाँकि, इन दिव्य खजानों के साथ, हलाहल नामक घातक जहर भी समुद्र से निकला। जहर इतना शक्तिशाली था कि यह पूरी सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता रखता था।

परिणामों से भयभीत होकर, देवताओं और असुरों ने विनाश और परिवर्तन के सर्वोच्च देवता, भगवान शिव से मदद मांगी। ब्रह्मांड को जहर के विनाशकारी प्रभाव से बचाने के लिए, भगवान शिव ने स्वेच्छा से इसे पी लिया।

जहर खाने के उनके कृत्य से उनका गला नीला हो गया, जिससे उन्हें “नीलकंठ” नाम मिला, जिसका अर्थ है “नीले गले वाला।” समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव की निस्वार्थता और त्याग के कार्य ने उन्हें अत्यधिक प्रशंसा और श्रद्धा का पात्र बना दिया।

सावन के संदर्भ में इस पौराणिक घटना को अक्सर इस महीने के दौरान भगवान शिव की पूजा से जोड़ा जाता है। भक्त इस समय को भगवान शिव की उदारता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और शक्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक विकास के लिए उनका आशीर्वाद मांगने के अवसर के रूप में मनाते हैं।

सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए समर्पित पूजा और तपस्या में संलग्न होने के लिए एक अनुकूल अवधि माना जाता है, जो समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव द्वारा प्रदर्शित भक्ति और बलिदान को दर्शाता है।

पूजाविधि:

सावन मास में की गई शिवपूजा विशेष कल्याणकारी होती है।

अपनी शरीर प्रकृति के अनुसार बहोत लोग पुरे महीने का व्रत करते है। लेकिन जिनको ये संभव नहीं है , वो लोग सावन महीनेकी हर सोमवार भी व्रत कर सकते है

शिवजी को बेलपत्र अधिक रूप से प्रिय होता है। जबभी आप शिवमंदिर दर्शन के लिए जाये तो अपने साथ बेलपत्र अवश्य ले के जाये।

सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठके सूरज को जल अर्पण करना चाहिए। सोमवार के दन आपने संकल्प करना है की आप सोमवार का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ कर रहे हो

 Dreamstime

पूजा की थाली में क्या आवश्यक होना चाहिए:

पूजा की थाली में रोली ,चावल,सिंदूर, गुलाल होना चाहिए। इसके साथ चन्दन , कच्चा दूध ,धतूरा और गंगाजल भी आवश्य रखे। ये सारी सामग्री शिवजी को विशेष प्रिय है। बेलपत्र तो शिवजी को अतिप्रिय है। ये साडी चीजे चढाने से शिवजी जरूर प्रसन्ना होते है।

pexel

शिवजी भोग क्या लगाना चाहिए?:

दूध से बनी कोई भी मिठाई शिवजी को प्रिय है। फल ,मिष्टान्न ,पंचामृत का भी भोग लगाया जा सकता है।

कौनसे मंत्र का जप करे ?:

भगवन शिवजी को “ॐ नमः शिवाय ” का जप पसंद है। आप 108 बार अथवा 1008 बार इसी मंत्र का जप करना है।

Leave a Reply

%d