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DR. Mangala Narlikar no more : ज्येष्ठ गणितज्ञ और कुशल अध्यापिका डॉ. मंगला जी ने 80 साल की आयु में ली आखिरी सांस 

DR. Mangala Narlikar no more : ज्येष्ठ गणितज्ञ और कुशल अध्यापिका डॉ. मंगला जी ने 80 साल की आयु में ली आखिरी सांस

updated : 17 July 2023 (2.52 pm IST)

सुप्रसिद्ध गणितज्ञ डॉ . मंगला नारलीकर (Dr. Mangala Naralikar ) का आज सुबह 5 और 5.30 के दरम्यान देहांत हो गया है। पिछले कुछ सालोंसे वे कैंसर से पीड़ित थी और आज आयु की 80 साल की उम्र में उन्होंने अपने निवासी घर पुणे में आखिरी साँस ली। ज्येष्ठ और प्रसिद्ध खगोल भौतिकीविद् डॉ. जयंत नारलीकर (Dr. Jayant Naralikar )की वो पत्नी थी। नार्लीकर पति पत्नी ने शिक्षा और अंतराल के क्षेत्र भारतवर्ष के लिए अमूल्य योगदान दिया है। मंगला नारलीकर जी का पार्थिव शरीर आईआईएसईआर में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए रखा जायेगा।

शिक्षा क्षेत्र में डॉ. मंगला जी का योगदान :

पिछले कुछ सालोसे मंगला जी कैंसर से पीड़ित थी। उनके ऊपर उपचार भीं चल रहे थे। उनके करीबी लोगोंसे पता चला है की अपने आखिरी दिनों में में भी वो बड़ी एक्टिव थी। डॉ. मंगला जी सुरुवात से ही गणित विषय में रूचि थी। डॉ. जयंत नारलीकर जी के साथ शादी करने के 16 साल बाद उन्होंने अपनी पीएचडीकी डिग्री हसिल की मुंबई, भारत में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) से गणित में

photo: Wikipedia

डॉ. मंगला जी पुणे यूनिवर्सिटी और मुंबई यूनिवर्सिटी में गणित अध्यापन का काम भी किया है।डॉ. मंगला नार्लीकर एक प्रसिद्द लेखिका भी थी। उन्होंने बच्चोंके लिए गणित और विज्ञान विषय की किताबे भी लिखी थी। “नभात हसरे तारे ” नमक उनकी किताब बहोत प्रसिद्द हुयी थी। डॉ. मंगला नार्लीकर जी ने महाराष्ट्र शासन के गणित विषय की शालेय किताब निर्मिति में भी योगदान दिया है।

.डॉ मंगला नार्लीकर वास्तव में एक गणितज्ञ थी। वह एक भारतीय गणितज्ञ हैं जिन्हें बीजगणितीय ज्यामिति के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए जाना जाता है। उनकी शोध रुचियों में बीजगणितीय चक्र, बीजगणितीय कोबॉर्डिज्म, प्रतिच्छेदन सिद्धांत और मोटिविक होमोटॉपी सिद्धांत शामिल हैं।   उन्होंने प्रिंसटन, न्यू जर्सी में इंस्टीट्यूट फॉर एडवांस्ड स्टडी और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले सहित विभिन्न संस्थानों में काम किया है। डॉ. नार्लीकर ने प्रतिष्ठित गणितीय पत्रिकाओं में शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और अपने काम के माध्यम से बीजगणितीय ज्यामिति की उन्नति में योगदान दिया है।

photo: Wikipedia

आईआईएसईआर में रखा जाएगा पार्थिव शरीर:

उनके परिवार में उनके पश्चात् पति डॉ. जयंत नार्लीकर, तीन  बेटियांऔर पांच नाती नातिन है। डॉ. मंगला नारलीकर जी का पार्थिव शरीर आईआईएसईआर में श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए रखा जायेगा। उसके बाद पुणे की वैकुण्ठ श्मशानभूमि में अंत्यसंस्कार किये जायेंगे। आज हमारे समाज ने बहोतहि उमदा व्यक्तित्व और बढ़िया शिक्षक खो दिया है। लेकिन उनका कार्य और शिक्षणक्षेत्र ने रहा उनका योगदान हम हमेशा याद रखेंगे।

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