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12 Jyotirlinga Temples in India: भारत में 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों की सूची

12 Jyotirlinga Temples in India: भारत में 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों की सूची

 ज्योतिर्लिंग क्या है?

ज्योति का अर्थ है चमक और लिंगम का अर्थ है शिव की छवि या चिन्ह

इस प्रकार त्योतिर्लिंगम का अर्थ है सर्वशक्तिमान शिव का दीप्तिमान चिन्ह

भारत में 12 ज्योतिर्लिंग मंदिरों की सूची:

  • सोमनाथ मंदिर, गुजरात
  • मल्लिकार्जुन मंदिर, आंध्र प्रदेश
  • महाकालेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश
  • ओंकारेश्वर मंदिर और ममलेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश
  • केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड
  • भीमाशंकर मंदिर, महाराष्ट्र
  • काशी विश्वनाथ मंदिर, उत्तर प्रदेश
  • त्र्यंबकेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र
  • बैद्यनाथ धाम, झारखंड
  • नागेश्वर मंदिर, गुजरात
  • रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम
  • ग्रिष्णेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र

सोमनाथ मंदिर, गुजरात:

सोमनाथ मंदिर भारत के गुजरात राज्य में स्थित एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। यह मंदिर गिर सम्राट भाद्रबाहु ने सन् ७२० में निर्माण किया था, लेकिन इसके बाद कई बार यह मंदिर नष्ट हुआ और पुनर्निर्माण किया गया।

सोमनाथ मंदिर भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इसे सौराष्ट्र क्षेत्र के प्रमुख पीठों में गिना जाता है और यह हिंदू धर्म के एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

सोमनाथ मंदिर को सोमेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ होता है “चंद्रमा का स्वामी”। यह मंदिर प्राचीन भारतीय वास्तुकला का एक अद्वितीय उदाहरण माना जाता है और इसे देखने के लिए कई श्रद्धालु और पर्यटक यहां आते हैं।

सोमनाथ मंदिर की स्थापना एक विशेष पौराणिक कथा के अनुसार हुई है। इस कथा के अनुसार, सोमनाथ मंदिर का निर्माण सन् ७२० में भगवान शिव के भक्त भाद्रबाहु द्वारा किया गया था। मंदिर का मुख्य गोपुरम् मिश्रण शैली में था और यह स्वर्ण से ढंका गया था।

सोमनाथ मंदिर ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे कई बार आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किया गया और उसके बाद पुनर्निर्माण किया गया। सबसे पहले महमूद गजनवी ने सन् १०२४ में इसे नष्ट किया। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी, जाफरशाह, अहमदशाह, अकबर और अभयसिंग ने भी इस मंदिर को आक्रमणित किया था। आखिरकार, सन् १९५० में इसे फिर से पुनर्निर्माण किया गया।

वर्तमान में, सोमनाथ मंदिर प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में मशहूर है। यह भक्तों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण है, जहां वे हिंदू धर्म की महत्वपूर्णता को महसूस कर सकते हैं और इसकी आध्यात्मिकता का आनंद ले सकते हैं।

मल्लिकार्जुन मंदिर, आंध्र प्रदेश:

मल्लिकार्जुन मंदिर एक प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है, जो आंध्र प्रदेश के स्रीशैलम नामक स्थान पर स्थित है। यह मंदिर भारतीय देवी देवता शक्ति का और भगवान शिव का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थान है।

मल्लिकार्जुन मंदिर श्रीपद शैलम या श्रीशैलम के नाम से भी जाना जाता है, और यह शिव और शक्ति के साथ मिलकर पूजी जाती है। यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरण माना जाता है और इसे उच्चकोटि स्थलों में गिना जाता है।

मल्लिकार्जुन मंदिर का निर्माण कार्य 5वीं शताब्दी में श्रीपद शैलम चोल राजवंश के राजा गजपति द्वारा किया गया था। इसके बाद से, मंदिर को नियमित रूप से सुधारा और विस्तारित किया गया है।

मल्लिकार्जुन मंदिर में भगवान शिव को मल्लिकार्जुन स्वामी के नाम से पूजा जाता है, जबकि देवी दुर्गा को भ्रमराम्बा देवी के नाम से पुजा जाता है। यहां एक श्रद्धालु भक्ति, ध्यान और आध्यात्मिकता का आनंद ले सकता है।

मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्र प्रदेश में एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और इसे देश और विदेश से आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए आगंतुकों द्वारा प्रस्तुत किया जाता है। यहां कुछ प्रमुख उत्सवों का आयोजन किया जाता है जैसे कि महाशिवरात्रि, नवरात्रि, और कार्तिक मास के सोमवार को जब भक्तों द्वारा शिव की पूजा की जाती है।

यह मंदिर इतिहास, आध्यात्मिकता और सौंदर्य के संगम पर ध्यान केंद्रित करता है, और यह एक महत्वपूर्ण हिंदू धार्मिक स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है।

महाकालेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश:

महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर उज्जैन शहर में स्थित है और महाकाल के नाम से प्रसिद्ध है।

महाकालेश्वर मंदिर महाकाल नामक पहाड़ पर स्थित है और यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला के उदाहरण के रूप में महत्वपूर्ण है और इसे धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में चाहिए जाता है।

महाकालेश्वर मंदिर का निर्माण काल इतिहासिक रूप से विविध युगों में हुआ है। मंदिर का प्राचीन भाग भारतीय वास्तुकला की शैली में निर्मित है और बाद में इसे विस्तारित और सुधारा गया है।

मंदिर में महाकालेश्वर नामक भगवान शिव को पूजा जाता है। इसके अलावा, यहां भगवती के रूप में देवी जगदम्बा का भी स्थान है। मंदिर में दैनिक पूजा और आरती की विशेष प्रक्रियाएं होती हैं, और यहां भक्तों को आध्यात्मिक और धार्मिक अनुभव का आनंद लेने का मौका मिलता है।

महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है, और यहां कई परंपरागत और आध्यात्मिक मेलों का आयोजन किया जाता है। सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा होती है, जो अपार भक्तों को आकर्षित करती है।

महाकालेश्वर मंदिर महाकाल मार्ग वैदिक वाणी के आधार पर भारतीय संस्कृति और धर्म के महत्व का प्रतीक है। यह मंदिर धार्मिक महत्व, सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिकता के संगम पर आधारित है।

ओंकारेश्वर मंदिर और ममलेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश:

ओंकारेश्वर मंदिर और ममलेश्वर मंदिर दोनों मध्य प्रदेश, भारत में स्थित हैं। ये दोनों मंदिर महेश्वर जिले में स्थित हैं और भगवान शिव को समर्पित हैं।

ओंकारेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश में महानंदी नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर पश्चिम भारतीय वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरण माना जाता है। इस मंदिर का निर्माण भोपाल के नवाब शाहजहां के समय में हुआ था। यह मंदिर अपनी विशेष स्थानीय वास्तुकला, चित्रों और मार्मिक कार्य के लिए प्रसिद्ध है।

ममलेश्वर मंदिर अमरकंटक नगर में स्थित है। यह मंदिर तेंबी नदी के किनारे स्थित है और उच्चकोटि के स्थानों में गिना जाता है। यह एक प्रमुख शैव मंदिर है और इसे मामलेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति, कला और वास्तुशास्त्र का अद्वितीय उदाहरण है।

ओंकारेश्वर मंदिर और ममलेश्वर मंदिर दोनों ही हिंदू धार्मिक स्थल हैं और यहां भक्तों को शिव की पूजा करने और आध्यात्मिकता का आनंद लेने का अवसर मिलता है। ये मंदिर पर्यटन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं और इसके आसपास कई प्राकृतिक सुंदरताओं का आनंद लिया जा सकता है।

इन मंदिरों के आसपास कई त्योहारों का आयोजन किया जाता है और खासकर महाशिवरात्रि को यहां विशेष धार्मिक उत्सव मनाया जाता है। भक्तों और पर्यटकों को इन मंदिरों में आनंद और शांति का अनुभव करने का अवसर मिलता है।


केदारनाथ मंदिर, उत्तराखंड:

केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर उत्तराखंड के गर्हवाल श्रेणी में स्थित है और हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता में लपेटा हुआ है।

केदारनाथ मंदिर चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह भारतीय धार्मिक और आध्यात्मिक संस्कृति का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरागत भारतीय वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरण के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसका इतिहास हजारों साल पुराना है।

केदारनाथ मंदिर को चार युगों के दौरान निर्मित किया गया है और यह बार-बार भूकंपों और नाश के कारण नष्ट हो गया है। इसके बावजूद, मंदिर प्रत्येक बार पुनर्निर्माण किया गया है और धार्मिक भक्तों के लिए महत्वपूर्ण स्थल बना रहा है।

केदारनाथ मंदिर में भगवान शिव को केदारेश्वर नाम से पूजा जाता है। यहां भगवान का मूर्तिकार आकर्षक स्वयंभू शिवलिंग है, जिसे श्रद्धालु भक्तों की पूजा और आराधना के लिए उपयोग किया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा, आरती, और भक्ति कार्यक्रम होते हैं।

केदारनाथ मंदिर एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है और यहां कई श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। यहां पहुंचने के लिए यात्रियों को उत्तराखंड के गर्हवाल क्षेत्र से पथिक यात्रा करनी पड़ती है। मंदिर के आसपास कई आध्यात्मिक स्थान, प्राकृतिक सुंदरता और यात्रा स्थल हैं जिन्हें दर्शन करने का आनंद लिया जा सकता है।

भीमाशंकर मंदिर, महाराष्ट्र:

भीमाशंकर मंदिर महाराष्ट्र, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर सातारा जिले के भीमाशंकर शिखर पर स्थित है और सह्याद्री पर्वतराज्य में स्थित है।

भीमाशंकर मंदिर भारतीय धार्मिक संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के केंद्र के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह परंपरागत महाराष्ट्रीय वास्तुकला के अद्वितीय उदाहरणों में से एक है और इसे प्राकृतिक सुंदरता के आदर्श में लिया जाता है।

भीमाशंकर मंदिर का निर्माण अपराधी भीमाशंकर द्वारा किया गया था, जो महाभारत के कथानक के अनुसार भगवान शिव की प्रतिमा का प्रशासन करता था। मंदिर की आधारशिला लगभग 13वीं शताब्दी में रची गई थी, जबकि इसका मुख्य गोपुरम् 18वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था।

भीमाशंकर मंदिर में भगवान शिव को भीमाशंकर नाम से पूजा जाता है। मंदिर के भीतर एक विशेष प्रतिमा है, जिसे भक्तों की पूजा के लिए संरक्षित किया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजा, आरती, और भक्ति कार्यक्रम होते हैं।

भीमाशंकर मंदिर महाराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और यहां कई श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। मंदिर के पास एक प्राकृतिक उद्यान है जहां आकर्षक वनस्पतियों और जलप्रपातों का आनंद लिया जा सकता है। इसके अलावा, यहां धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है।

भीमाशंकर मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां आध्यात्मिकता, शांति और सौंदर्य का अनुभव किया जा सकता है। यह जगह भारतीय धार्मिक विरासत के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में मान्यता प्राप्त करती है।

काशी विश्वनाथ मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित सबसे प्रमुख हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर वाराणसी (काशी) शहर में स्थित है, जिसे धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर काशी के मुख्य मंदिर हैं और इसे विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर पुरातात्विक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और भारतीय वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण काशीनाथ किंगडम के महानायक राजा नागभट्ट द्वारा किया गया था। इसके बाद से, मंदिर को विस्तारित, सुधारा और पुनर्निर्मित किया गया है।

काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव को विश्वनाथ नाम से पूजा जाता है। मंदिर का मुख्य स्थान एक अत्यंत पवित्र शिवलिंग है, जिसे श्रद्धालु भक्तों की पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। मंदिर में विशेष पूजा, आरती, और भक्ति कार्यक्रम दिनचर्या के हिस्से हैं।

काशी विश्वनाथ मंदिर भारत और विदेश से आने वाले शिव भक्तों के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां हर वर्ष कई शिवरात्रि और दिवाली जैसे पर्वों के दौरान लाखों भक्तों की आवाज उठती है। इसके अलावा, यहां काशी विश्वनाथ मंदिर के आसपास कई आश्रम, धार्मिक स्थल और तीर्थ स्थल हैं जहां श्रद्धालु भक्तों को आध्यात्मिक और धार्मिकता का आनंद मिलता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर अपने महत्वपूर्ण धार्मिकता, ऐतिहासिकता और प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है और यह भारतीय धर्म, दर्शन, और आध्यात्मिकता के एक प्रमुख प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त करता है।

 

त्र्यंबकेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र:

त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर नासिक जिले के त्र्यंबक नगर में स्थित है और सह्याद्री पर्वत श्रृंगार में स्थानित है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसे भारतीय संस्कृति, प्राकृतिक सुंदरता, और ऐतिहासिक महत्व का प्रतीक माना जाता है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर का निर्माण पुनर्निर्मित किया गया है, लेकिन इसका इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मंदिर में ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव की प्रतिमा है, जो भक्तों की पूजा और आराधना के लिए संरक्षित की जाती है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के तीर्थ स्थलों में से एक है और यह धार्मिक और पर्यटन स्थल के रूप में महत्वपूर्ण है। यहां वार्षिक अष्टविंशति महाकुंभ मेला आयोजित होती है जिसे लाखों भक्त आते हैं। मंदिर के पास कई आध्यात्मिक स्थान, प्राकृतिक सुंदरता के स्थान और यात्रा स्थल हैं जिन्हें दर्शन करने का आनंद लिया जा सकता है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर महाराष्ट्रीय धर्म और संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त करता है और यहां आने वाले भक्तों को आध्यात्मिकता, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने का अवसर मिलता है।

 

बैद्यनाथ धाम, झारखंड:

बैद्यनाथ धाम झारखंड, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल है। यह धाम देवघर जिले में स्थित है और श्रद्धालु भक्तों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

बैद्यनाथ धाम को बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर पुरातात्विक महत्वपूर्णता और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और भारतीय वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।

बैद्यनाथ धाम का निर्माण श्रद्धालु राजा भाणु के द्वारा किया गया था। मंदिर की मुख्य भव्यता उसके गोपुरम् और शिखरों में दिखाई देती है।

बैद्यनाथ धाम में भगवान शिव को बैद्यनाथ नाम से पूजा जाता है। मंदिर का मुख्य स्थान एक पवित्र शिवलिंग है, जिसे भक्तों की पूजा के लिए उपयोग किया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन पूजा, आरती, और भक्ति कार्यक्रम होते हैं।

बैद्यनाथ धाम भारत और विदेश से आने वाले शिव भक्तों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। इसे वार्षिक महाशिवरात्रि के दौरान लाखों भक्त आते हैं। मंदिर के आसपास भी तीर्थ स्थल और पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें दर्शन करने का आनंद लिया जा सकता है।

बैद्यनाथ धाम झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है और यहां भक्तों को आध्यात्मिकता, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने का अवसर मिलता है।

 

नागेश्वर मंदिर, गुजरात:

नागेश्वर मंदिर गुजरात, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर सोमनाथ जिले के नागेश्वर गांव में स्थित है और अरब सागर के किनारे स्थित है।

नागेश्वर मंदिर भारतीय धार्मिकता, प्राकृतिक सौंदर्य, और ऐतिहासिक महत्व के केंद्र में से एक है। यह मंदिर भारतीय वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण है और इसे शैलजा का राज माना जाता है।

नागेश्वर मंदिर का निर्माण गुजरात के चालुक्य शासकों द्वारा १२वीं शताब्दी में किया गया था। मंदिर का प्रमुख भव्यता उसके विशाल गोपुरम् और गुंबदों में दिखाई देती है।

नागेश्वर मंदिर में भगवान शिव को नागेश्वर नाम से पूजा जाता है। मंदिर के भीतर एक प्रमुख शिवलिंग है, जिसे श्रद्धालु भक्तों की पूजा के लिए संरक्षित किया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम होते हैं।

नागेश्वर मंदिर गुजरात का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और यहां कई श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। मंदिर के पास एक प्राकृतिक सौंदर्य वाला तट स्थल है, जहां आकर्षक बीच, सागर और पर्यटन सुविधाएं हैं। इसके अलावा, यहां तीर्थ स्थल, धार्मिक स्थल और पर्यटन स्थल भी हैं जिन्हें दर्शन करने का आनंद लिया जा सकता है।

नागेश्वर मंदिर गुजरात की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है और यहां भक्तों को आध्यात्मिकता, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने का अवसर मिलता है।


रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम:

रामनाथस्वामी मंदिर रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर भारतीय संस्कृति और धार्मिकता का महत्वपूर्ण केंद्र है और यह श्री रामेश्वरम क्षेत्र में स्थित है, जो पंचभूत स्थलों में से एक है।

रामनाथस्वामी मंदिर को भारतीय धार्मिकता में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और इसे अद्वितीय वास्तुकला के उदाहरण के रूप में मान्यता प्राप्त है।

रामनाथस्वामी मंदिर को श्री रामनाथस्वामी ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिकता के दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यह श्री रामेश्वरम क्षेत्र के पास स्थित है।

रामनाथस्वामी मंदिर का निर्माण चोल राजवंश के शासकों द्वारा किया गया था। मंदिर का भव्य गोपुरम् और विशाल शिखर इसकी आकर्षण की एक मुख्य विशेषता है।

रामनाथस्वामी मंदिर में भगवान शिव को रामनाथस्वामी नाम से पूजा जाता है। मंदिर के अंदर शिवलिंग को प्रतिदिन पूजा और अर्चना के लिए संरक्षित किया जाता है। मंदिर में विशेष पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम होते हैं जो भक्तों की सेवा के लिए आयोजित किए जाते हैं।

रामनाथस्वामी मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और श्रद्धालु भक्तों के बीच बहुत लोकप्रिय है। यहां हर साल महाशिवरात्रि और अन्य पर्वों के दौरान लाखों भक्तों की आवाज उठती है। मंदिर के पास कई पर्यटन स्थल, तीर्थ स्थल और आध्यात्मिक स्थल हैं जिन्हें दर्शन करने का आनंद लिया जा सकता है।

रामनाथस्वामी मंदिर भारतीय धर्म और संस्कृति का महत्वपूर्ण प्रतीक है और इसे आध्यात्मिकता, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम स्थल माना जाता है।

 

ग्रिष्णेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र:

ग्रिष्णेश्वर मंदिर महाराष्ट्र, भारत में स्थित है और यह भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर है। यह मंदिर एजोली ग्रिष्णेश्वर गांव में स्थित है, जो अहमदनगर जिले में स्थित है।

ग्रिष्णेश्वर मंदिर एक प्राचीन मंदिर है और इसका निर्माण चालुक्य वंश के किंग विक्रमादित्य प्रथम द्वारा किया गया था। मंदिर आधुनिक महत्वपूर्णता रखता है और भारतीय वास्तुकला का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है।

ग्रिष्णेश्वर मंदिर का प्रमुख भव्यता उसके शिखर और वास्तुकला है। मंदिर में चालुक्य काल की कला का प्रभाव दिखाई देता है।

ग्रिष्णेश्वर मंदिर में भगवान शिव को ग्रिष्णेश्वर नाम से पूजा जाता है। मंदिर में एक प्रमुख शिवलिंग है, जिसे श्रद्धालु भक्तों की पूजा के लिए संरक्षित किया जाता है। मंदिर में प्रतिदिन पूजा, आरती और भक्ति कार्यक्रम होते हैं जो श्रद्धालु भक्तों की सेवा के लिए आयोजित किए जाते हैं।

ग्रिष्णेश्वर मंदिर महाराष्ट्र के धार्मिक और पर्यटन स्थलों में से एक है और श्रद्धालु भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है। मंदिर के पास एक प्राकृतिक रूप से सुंदर वातावरण और कई आध्यात्मिक स्थल हैं जिन्हें दर्शन करने का आनंद लिया जा सकता है।

ग्रिष्णेश्वर मंदिर महाराष्ट्रीय धार्मिक और संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त करता है और यहां भक्तों को आध्यात्मिकता, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करने का अवसर मिलता है।

यह भारत का सबसे छोटा जोतिर्लिंग है जिसे बारहवां जोतिर्लिंग माना जाता है

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